राज्यपाल ने सहायता समूह की महिलाओं से वार्ता कर उनके उत्पादों और उनकी आय के बारे में जानकारी ली

Uttarakhand News

राज्यपाल Lt Gen Gurmit Singh अपने एक दिवसीय जनपद ऊधमसिंह नगर भ्रमण पर पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय पहुँचकर मधु वाटिका, गौरा देवी प्रशिक्षण केंद्र एवं देवकीनंदन अग्रवाल ऑफ बाजपुर छात्र मनोरंजन केंद्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से वार्ता कर उनके उत्पादों और उनकी आय के बारे में जानकारी ली। इसके उपरांत राज्यपाल ने पंतनगर के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के रतन सिंह सभागार में आयोजित विद्यार्थियों एवं वैज्ञानिकों से संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। राज्यपाल ने सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों व वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे लिए गर्व का विषय है कि यह विश्वविद्यालय न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया में कृषि और तकनीकी शिक्षा का एक प्रतिष्ठित केंद्र है, जिसने भारतीय कृषि के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय आरंभ से ही कृषि शिक्षा अनुसंधान, प्रसार एवं कृषि विकास के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में जाना जाता रहा है। ज्ञान और नवाचार के इस केंद्र द्वारा आधुनिक तकनीक के प्रयोग से कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल रही है। राज्यपाल ने कहा कि भगवान शिव के त्रिशूल की शक्ति के भांति तीन महत्वपूर्ण लोकार्पण हुए हैं जो विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों, परीक्षाओं और कक्षाओं के बारे में नहीं है अपितु यह समग्र विकास के बारे में है। इसके लिए जरूरी है कि स्टूडेंट्स अकादमिक रूप से उत्कृष्ट होने के साथ ही पाठ्येतर गतिविधियों, खेलों और सामाजिक सहभागिता में भी शामिल हों। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह केंद्र रचनात्मकता, शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने वाले वातावरण को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध होगा। राज्यपाल ने कहा उत्तराखण्ड की नारी शक्ति आत्मनिर्भरता और सफलता की एक नई कहानी लिख रही हैं। हमारी माताएं, बहनें और बेटियां अपने संकल्प और समर्पण से शिक्षा, कृषि, उद्यमिता, खेल, प्रशासन और अन्य विविध क्षेत्रों में एक नई पहचान बना रही है। वे समाज में अपनी निर्णायक भूमिका निभाते हुए उत्तराखण्ड का नाम रोशन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में राज्य में स्वयं सहायता समूह एक क्रांतिकारी परिवर्तन का वाहक बन रहे हैं। हजारों महिलाओं ने इन समूहों के माध्यम से अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता सिद्ध की है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की जलवायु और वनस्पतियों की अनुकूलता मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। मधुमक्खियां परागण (पॉलिनेशन) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे फसलों की उपज और गुणवत्ता में वृद्धि होती है। शहद उत्पादन से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का शहद, जो अपनी प्राकृतिक शुद्धता और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है। राज्यपाल ने कहा कि आज के दौर में तकनीकी विकास के साथ-साथ सतत कृषि और जैविक खेती की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। जल संरक्षण, मृदा उर्वरता बनाए रखना और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।